बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी
मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है
“From idols, hopes for you; from God, faith. Tell me, truly, what is impiety?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
बुतों से तुझ को उम्मीदें, ख़ुदा से नौमीदी। मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है।
विस्तार
यह शेर इंसान के ईमान और उसकी उलझनों को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। शायर पूछ रहे हैं कि जब कोई व्यक्ति एक तरफ़ मूर्तियों को उम्मीदें देता है और दूसरी तरफ़ खुदा से भी उम्मीदें रखता है, तो उसका हाल क्या है? और फिर वो सवाल करते हैं कि इस स्थिति में 'काफ़िरी' (अविश्वास) क्या है? यह हमें अपने विश्वास की सच्चाई पर सोचने को मजबूर करता है।
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