गला तो घोंट दिया अहल-ए-मदरसा ने तिरा
कहाँ से आए सदा ला इलाह इल-लल्लाह
“The scholar's tongue strangled your declaration, From where did you bring the 'La Ilaha Illallah'?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
अहल-ए-मदरसा ने तुम्हारा गला घोंट दिया, फिर तुम कहाँ से लाओगे 'ला इलाहा इल-लल्लाह' का जाप?
विस्तार
इस शेर में शायर ने एक बहुत गहरा सवाल उठाया है। वह कह रहे हैं कि जब किसी व्यक्ति की आवाज़ को ही धार्मिक संस्थानों (मदरसा) ने गला घोंट दिया हो, तो वह कैसे 'ला इलाहा इल्लल्लाह' का जाप कर पाएगा? यह सिर्फ़ एक कविता नहीं है, बल्कि एक सामाजिक और बौद्धिक टिप्पणी है। यह उन लोगों पर तंज है जो सच्चाई को दबाते हैं, और यह दिखाता है कि जब सत्य की बात होगी, तो गला घोंटने वाले भी चुप नहीं रह सकते।
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