जलाल-ए-पादशाही हो कि जम्हूरी तमाशा हो
जुदा हो दीं सियासत से तो रह जाती है चंगेज़ी
“Whether it is the glory of the empire, or a republican spectacle, If it is separated from politics, then it remains Genghis.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
जलाल-ए-पादशाही हो या जम्हूरी तमाशा, अगर इसे सियासत से अलग किया जाए, तो यह चंगेज़ी ही रह जाता है।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ सियासत की बात नहीं करता, बल्कि एक गहरे विचार को सामने रखता है। शायर Allama Iqbal कहते हैं कि क्या यह शासन की शान-ओ-शौकत वाली 'पादशाही' है, या सिर्फ़ एक दिखावटी 'जम्हूरी तमाशा'? वो कहते हैं कि असली जो आग है, जो चंगेज़ी की रूह है... वो सियासत के किसी भी सिस्टम से अलग होकर भी ज़िंदा रह जाती है। एक महान विचार हमेशा ज़िंदा रहता है।
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