ज़माम-ए-कार अगर मज़दूर के हाथों में हो फिर क्या
तरीक़-ए-कोहकन में भी वही हीले हैं परवेज़ी
“If the tools of the craft are in the hands of the laborer, then what Are there such differences in the paths of the beloved?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
अगर कारीगरी के औज़ार मज़दूर के हाथों में हैं, तो फिर क्या महबूब के रास्ते में भी वही हीलें हैं परवेज़ी।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ कला की बात नहीं करता, बल्कि जीवन के सफ़र की बात करता है। शायर कहते हैं कि अगर किसी चीज़ को बनाने का हुनर... अगर वह किसी आम मज़दूर के हाथों में आ जाए, तो सबसे मुश्किल रास्ता भी... बस एक रवायत बनकर रह जाएगा। यह बताता है कि असली गहराई... केवल हुनर से नहीं, बल्कि रूह से आती है।
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