कहीं सरमाया-ए-महफ़िल थी मेरी गर्म-गुफ़्तारी
कहीं सब को परेशाँ कर गई मेरी कम-आमेज़ी
“Sometimes my warm conversation was the delight of the gathering, Sometimes my lack of presence disturbed everyone.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
कभी-कभी मेरी गर्मजोशी भरी बातें महफ़िल का सरमाया थीं, और कभी-कभी मेरी अनुपस्थिति सब को परेशान कर गई।
विस्तार
यह शेर एक गहरे विरोधाभास को बयान करता है। शायर कहते हैं कि एक तरफ उनकी बातें, उनकी गर्मजोशी, महफ़िल का गहना थीं। लेकिन दूसरी तरफ़... उनका बस होना, उनका वजूद ही सबको बेचैन कर गया! यह बताता है कि कभी-कभी जो चीज़ हमें सबसे ज़्यादा आकर्षित करती है, वही सबसे बड़ी परेशानी का कारण भी बन जाती है। एक ही शख्सियत का दोहरा असर!
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