“Always like a lotus in water, faultless and unstained:We are lamps of divine light.”
हमेशा पानी में कमल की तरह निर्दोष और बेदाग रहना चाहिए। हम दिव्य ज्योति के दीपक हैं।
यह सुंदर दोहा हमें कमल के फूल की तरह शुद्धता और शालीनता के साथ जीना सिखाता है। कमल पानी में उगता है, लेकिन उस पर पानी का कोई दाग नहीं लगता, वह हमेशा बेदाग और सुंदर रहता है। इसी तरह, हमें भी अपने जीवन को दोषों और दागों से मुक्त रहकर जीना चाहिए, चाहे हमारे आसपास कुछ भी हो, अपनी आंतरिक पवित्रता बनाए रखनी चाहिए। यह हमें याद दिलाता है कि हम मूल रूप से ऐसे दीपक हैं जो अपने भीतर एक दिव्य प्रकाश लिए हुए हैं। यह प्रकाश शुद्ध, बेदाग है, और इसका उद्देश्य अपनी अंतर्निहित अच्छाई और ज्ञान से हमें और दूसरों को प्रकाशित करना है।
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