“Oh, destitute one, roll the bidis!Roll bidis, five hundred for twelve paisa, oh!”
हे बेसहारा, बीड़ीयाँ बनाओ। बारह पैसे में पाँच सौ बीड़ीयाँ बनाओ।
यह दोहा बीड़ी बनाने वाले किसी ऐसे व्यक्ति का मार्मिक चित्रण करता है, जो 'निराधार' यानी बेसहारा है। यह उन्हें बीड़ी बनाने का सीधा निर्देश देता है। पंक्ति 'बारह पैसे में पांच सौ' उनके जीवन की कठोर वास्तविकता को उजागर करती है – अत्यधिक शारीरिक श्रम के बदले मिलने वाला बेहद कम वेतन। यह गरीबी में जीने वाले लोगों की निराशा और शोषण को दर्शाता है, जिन्हें नाममात्र की कमाई के लिए ऐसा कठिन काम करने पर मजबूर होना पड़ता है। यह दोहा चुपचाप जीवन-संघर्ष पर टिप्पणी करता है, जहाँ ऐसी मामूली कमाई भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह उस समय की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर एक विनम्र लेकिन शक्तिशाली टिप्पणी है।
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
