પૂરાં જેનાં પ્રાછત કદીયે જડશે ન જી-
એવા પાપ-દાવાનલમાં જલે છે જનેતા મારી,
“Whose penance will never fully be found- In such a forest fire of sin, my mother burns.”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
मेरी माँ पापों की ऐसी भीषण अग्नि में जल रही है, जिसका पूरा प्रायश्चित कभी नहीं मिल पाएगा।
विस्तार
यह दोहा एक माँ के दर्दनाक हालात को बयां करता है, जो "पाप के दावानल" में जल रही है। इसका अर्थ है कि वह अपने पिछले कर्मों के कारण अथाह दुःख और परिणामों का सामना कर रही है। उसके पाप इतने गंभीर हैं कि किसी भी प्रकार का प्रायश्चित उन्हें पूरी तरह से धो नहीं सकता। यह छंद गहरे दुख और अपराधबोध के भारी बोझ का एक स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करता है, जहाँ उसके पिछले गलत कामों की विशालता के कारण मोक्ष असंभव सा लगता है। यह एक दुखद, अपरिहार्य पीड़ा का भाव जगाता है।
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