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ઓ સૌમ્ય-રૌદ્ર! કરાલ કોમલ! જાઓ રે, બાપુ!
કહેશે જગત: જોગી તણાં શું જોગ ખૂટ્યાં?

O mild and fierce! O dreadful, soft! Away now, friend!The world will ask: 'Have the yogi's powers reached their end?'

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

हे सौम्य-रौद्र, भयावह-कोमल! चले जाओ, मित्र। संसार कहेगा कि क्या योगी के योग (शक्ति/तप) समाप्त हो गए हैं?

विस्तार

यह दोहा एक शक्तिशाली, विरोधाभासी सत्ता से की गई मार्मिक विनती को दर्शाता है – जो सौम्य भी है और भयंकर भी, भयावह भी है और कोमल भी। यहाँ एक योगी उनसे तुरंत चले जाने का अनुरोध कर रहे हैं, कह रहे हैं, "हे प्रिय, कृपया चले जाओ!" इस जल्दबाजी का कारण लोगों की धारणा का डर है। योगी को चिंता है कि यदि वह सत्ता वहीं रुकती है, तो दुनिया उनकी आध्यात्मिक शक्ति पर सवाल उठाएगी, यह सोचते हुए कि "क्या योगी के पास अब साधना के लिए कुछ नहीं बचा है?" यह अपनी आध्यात्मिक प्रतिष्ठा और साधना में दुनिया के विश्वास को बचाने की एक भावुक अपील है।

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