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શીતળ નાજુક ને સુંવાળુઃ
મૉલને ઝરૂખે હું બેસીને કોડભર્યો

Cool, delicate, and tender; On the palace balcony I sit, filled with fond desire.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

शीतल, नाजुक और कोमल; मैं महल के झरोखे पर बैठा, कोमल इच्छाओं से भरा हुआ हूँ।

विस्तार

यह दोहा एक शांत और सुंदर पल का वर्णन करता है। कल्पना कीजिए आप किसी महल की बालकनी पर बैठे हैं, जहाँ शीतल, कोमल और मुलायम हवा आपको छू रही है। यह संतोष या किसी गहरी और खूबसूरत इच्छा से भरा एक क्षण है। यह पंक्ति बताती है कि दिल उमंगों या पवित्र आनंद से भरा है, जो एक शांत वातावरण में शांति और कोमलता का अनुभव कर रहा है। यह एक हल्की खुशी और आशा की भावना पैदा करता है, जहाँ हर एहसास नरम और सुखद होता है, जिससे एक गहरा और अनमोल अनुभव बनता है।

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