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ચાલતી ટ્રેને ચડવા ચાલ્યો -રેલ શું કાકી થાવે!
એક દા'ડો સૌ ઊંઘિયાં સુખે: ઘંટડી નવ સતાવે,

He went to board a moving train – does the rail become his aunt? One day all slept in peace profound: no bell would ever hound.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

वह चलती ट्रेन में चढ़ने चला गया – क्या रेल उसकी चाची बन जाती है? एक दिन सब सुख चैन से सोए, कोई घंटी उन्हें परेशान न कर पाई।

विस्तार

यह दोहा जीवन और मृत्यु के बारे में एक गहरा संदेश देता है। पहली पंक्ति पूछती है, "चलती ट्रेन में चढ़ने क्यों दौड़ते हो, क्या यह तुम्हारी चाची है जो तुम्हारा इंतज़ार करेगी?" यह हमें याद दिलाता है कि कुछ चीजें हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं, और हम उन्हें अपनी इच्छा से नहीं मोड़ सकते। जल्दबाजी या अनावश्यक जोखिम लेना मूर्खतापूर्ण हो सकता है। दूसरी पंक्ति एक शांत सत्य बताती है: "एक दिन सब शांति से सो गए; किसी को घंटी ने परेशान नहीं किया।" यह खूबसूरती से जीवन के अंत में मिलने वाली परम शांति का वर्णन करती है, जहाँ सभी चिंताएँ, समय-सीमाएँ और दैनिक मांगों की 'घंटियाँ' आखिरकार रुक जाती हैं। यह बताता है कि सांसारिक संघर्षों के समाप्त होने पर ही सच्ची शांति मिलती है।

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