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રસ-સુંદરતા કેરી શાયરી છે બધી જાળ સુનેરી ભૂખ્યાં જનને-
ત્યારે હાય રે હાય, કવિ! તુંને શબ્દોની ચાતરી ગૂંથવી કેમ ગમે!

All poetry, with its aesthetic beauty, is but a golden snare for the hungry soul.Alas then, O poet, how can you delight in weaving such a clever tapestry of words?

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

रस और सुंदरता से भरी सारी शायरी भूखे लोगों के लिए बस एक सुनहरा जाल है। हे कवि, तुम्हें शब्दों की ऐसी चतुर बुनाई करना कैसे अच्छा लगता है?

विस्तार

यह दोहा एक गहरी भावना व्यक्त करता है। यह सुझाव देता है कि जहाँ कविता अक्सर सुंदरता और भावना का लक्ष्य रखती है, वहीं जो लोग वास्तव में 'भूखे' हैं – शायद सत्य, न्याय या बस बुनियादी ज़रूरतों के लिए – ऐसे अलंकृत शब्द एक भ्रामक 'सुनहरी जाल' की तरह लग सकते हैं। कवि दुख व्यक्त करता है, 'हाय, कवि! तुम्हें ऐसे जटिल और चतुर शब्दों को बुनने में आनंद कैसे आ सकता है?' यह कला के उद्देश्य के बारे में एक मार्मिक प्रश्न है, जो कवियों को केवल सौंदर्यशास्त्र से परे देखने और अपने काम के गहरे प्रभाव और प्रासंगिकता पर विचार करने की चुनौती देता है, खासकर जब दुनिया गंभीर मुद्दों या मानवीय पीड़ा से जूझ रही हो। यह पूछता है कि क्या केवल सुंदर शब्द ही पर्याप्त हैं जब लोगों को कुछ और ठोस चीज़ की लालसा हो।

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