“Day and night, through every pulsing vein,The dreadful roar of machines does reign.”
दिन-रात जिनकी हर नस में मशीनों की भयानक गड़गड़ाहट गूँजती है।
यह दोहा उन लोगों का मार्मिक चित्रण करता है जिनके जीवन पर मशीनों का निरंतर, भारी शोर हावी रहता है। कल्पना कीजिए कारखानों में काम करने वाले मज़दूरों की, जहाँ सुबह से रात तक, और कभी-कभी पूरी रात भी, मशीनों की तेज़, कभी-कभी डरावनी आवाज़ उनके कानों में और उनके पूरे अस्तित्व में गूँजती रहती है। यह ऐसी ज़िंदगी का संकेत देता है जहाँ उद्योग का अथक शोर उनके दैनिक जीवन का एक अपरिहार्य हिस्सा है, शायद उस कठोर और गहन वातावरण को उजागर करता है जिसमें वे रहते हैं। यह औद्योगिक जीवन के व्यक्तियों पर पड़ने वाले प्रभाव की एक शक्तिशाली छवि है।
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