Sukhan AI
પટકૂળ નવે પાણી-ઘાટ પરે! એની સૂનમાં મીટ સમાઈ રહી,
એની ગાગર નીર તણાઈ રહી, એને ઘેર જવા દરકાર નહીં.

New raiments upon the bathing ghat! Her gaze is lost in a trance, Her water-pot drifts away, yet home she cares not to advance.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

नये वस्त्रों के साथ वह स्नान घाट पर है। उसकी दृष्टि किसी तल्लीनता में खोई हुई है, उसकी पानी की गागर बहती जा रही है, फिर भी उसे घर जाने की कोई परवाह नहीं है।

विस्तार

यह दोहा एक स्त्री का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करता है जो नदी के किनारे खड़ी है। साधारण वस्त्र पहने हुए, वह घाट पर है, पर उसका मन कहीं और खोया हुआ है। उसकी आँखें किसी गहरी सोच या उदासी में डूबी हुई हैं, वह अपने आसपास से पूरी तरह बेखबर है। उसकी बेसुधी इतनी गहरी है कि उसे अपनी गागर का नदी की धारा में बहते चले जाने का भी एहसास नहीं होता। उसे घर वापस जाने की भी कोई परवाह नहीं है, जो उसके गहरे चिंतन, उदासी या दुनियावी मामलों से उसकी विरक्ति को दर्शाता है। यह किसी ऐसे व्यक्ति की तस्वीर है जो अपनी आंतरिक दुनिया में पूरी तरह खोया हुआ है, और बाहरी वास्तविकता से विमुख है।

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पाठ
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