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મુખ માલતીફૂલની કૂંપળ ચાવતી કોણ બીજા કેરું ધ્યાન ધરે!
પનિહાર નવે શણગાર નદી કેરે તીર ગંભીર વિચાર કરે

Her lips a jasmine bud do gently chew; who then for others gives attention due?The water-bearer, newly adorned, in thought profound, by river's bank is found.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

अपने मुख में चमेली की कली चबाती हुई, वह भला किसी और पर ध्यान क्यों दे? नई साज-सज्जा से सजी पनिहारिन नदी के किनारे गंभीर विचारों में लीन है।

विस्तार

कल्पना कीजिए कोई मालती के फूलों की कोपलें चबाते हुए इतना मग्न है कि उसे और किसी की सुध नहीं। यह किसी सुखद पल में पूरी तरह खो जाने और सब कुछ भूल जाने की बात है। फिर, एक सजी-धजी पनिहारी को नदी किनारे देखें। अपने नए वस्त्रों और सुंदर परिवेश के बावजूद, वह गहरे विचारों में डूबी हुई है, उसका मन कहीं दूर है, शायद किसी महत्वपूर्ण बात पर विचार कर रहा है। यह दोहा बाहरी सुंदरता और आंतरिक एकाग्रता के बीच एक सुंदर विरोधाभास प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि जब हम वास्तव में किसी चीज़ में तल्लीन होते हैं, चाहे वह खुशी हो या गहन चिंतन, तो बाहरी दुनिया, यहाँ तक कि हमारे अपने आभूषण भी गौण हो जाते हैं।

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