અમો મિસ્કિનોને શી દૌલત મળી!
ગરુરી વધી નૈ, ગઈ ઓગળી.
“What wealth did we, the humble, acquire!Our pride did not increase, it melted away.”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
हमें, जो गरीब हैं, भला क्या दौलत मिली? हमारा घमंड बढ़ा नहीं, बल्कि पिघल गया।
विस्तार
यह खूबसूरत दोहा एक अनूठी दौलत की बात करता है। यह पूछता है, 'हमें, जो विनम्र हैं, क्या धन मिला?' और इसका जवाब गहरा है: हमारी गरूर बढ़ी नहीं, बल्कि पिघलकर खत्म हो गई। इसका मतलब है कि जो लोग सादगी से जीते हैं और दुनियावी चीज़ों से ज़्यादा लगाव नहीं रखते, उनकी असली 'प्राप्ति' ज़्यादा पैसा या ताकत नहीं होती, बल्कि विनम्रता का आशीर्वाद होता है। गर्व बढ़ने की बजाय, उनका अहंकार पिघल गया, जिससे उन्हें आंतरिक शांति और समझ मिली। यह बताता है कि सच्ची समृद्धि गर्व को त्यागने में है, न कि और अधिक इकट्ठा करने में।
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