ઘેરથી પ્રોઢિયે નીકળેલો.
વાટ જોતાં મળી આંખ એની હશે,
“He left his home at dusk.Waiting, her eyes must have met his.”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
वह शाम को घर से निकला था। इंतजार करते हुए, उसकी आँखें उससे मिली होंगी।
विस्तार
कोई शाम ढलते ही घर से निकला। उनके लौटने का इंतज़ार करते-करते, जो राह देख रहा था, उसकी आँखें शायद इंतज़ार में ही बंद हो गई होंगी, यानी वह सो गया होगा। यह दो पंक्तियाँ प्रेम और विरह की गहराई को दर्शाती हैं। यह उस व्यक्ति की कोमल प्रतीक्षा और समर्पण को चित्रित करता है, जो अपने प्रिय के लौटने की उम्मीद में देर रात तक जागता रहा, जब तक कि इंतज़ार की थकान और प्रेम की मीठी उम्मीद उसे नींद में नहीं खींच ले गई।
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