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તેલ ખૂટ્યું હશે -હુંય ઘેલો
દીપમાલા ત્યજી ત્યાં નિહાળી રહ્યો,

Perhaps the oil has run out - and I, a fool,Abandoned the lamp-chain, gazing steadfast there.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

शायद तेल खत्म हो गया होगा, और मैं मूर्ख, दीपमाला को छोड़कर वहीं टकटकी लगाकर देखता रहा।

विस्तार

यह दोहा मूर्खतापूर्ण अहसास के एक क्षण को खूबसूरती से पकड़ता है। वक्ता देखता है कि दीयों में तेल खत्म हो गया होगा। फिर भी, वह अपनी मूर्खता स्वीकार करता है कि वह उसी दिशा में टकटकी लगाए रहा, उन दीयों की माला को पूरी तरह से छोड़कर जो कभी प्रकाश देती थी। यह एक कोमल प्रतिबिंब है कि हम अक्सर ऐसी जगहों पर समाधान या आशा खोजते हैं जहाँ स्रोत पहले ही सूख चुका है, स्पष्ट सत्य को अनदेखा करते हुए। कवि विनम्रतापूर्वक एक खोए हुए कारण या एक समाप्त स्रोत पर हठपूर्वक ध्यान केंद्रित करने की इस सामान्य मानवीय प्रवृत्ति को स्वीकार करता है, जो एक सार्वभौमिक चूक को उजागर करता है।

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