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વૈશાખી દાવાનલ! આવો, દિલદાર!
ચોગમ હુતાશન ચેતાવો, દિલદાર!

O Vaishakh's fiery blaze! Come, my beloved!Kindle the flames all around, my beloved!

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

कवि अपने प्रियतम को वैशाख की अग्निज्वाला कहकर बुलाता है और उनसे आग्रह करता है कि वे आकर चारों दिशाओं में अग्नि प्रज्वलित करें।

विस्तार

यह दोहा अपने प्रिय को 'वैशाखी दावानल' कहकर बुला रहा है, जो एक बहुत ही तीव्र और शक्तिशाली आह्वान है। 'वैशाखी' वैशाख मास (अप्रैल-मई) को संदर्भित करता है, जो गर्मी और प्रचंडता का प्रतीक है। 'दावानल' या जंगल की आग गहन जुनून, ऊर्जा या किसी बड़े परिवर्तन की ओर इशारा करती है। प्रेमी अपने प्रिय से चारों ओर 'हुताशन' जलाने का आग्रह कर रहा है। यहाँ 'हुताशन' केवल वास्तविक आग नहीं, बल्कि प्रेम की ज्वाला, उत्साह, परिवर्तन की ऊर्जा या किसी क्रांतिकारी भावना का प्रतीक है। यह एक भावुक निवेदन है कि प्रिय अपने आगमन से चारों ओर एक उत्साही और परिवर्तनकारी वातावरण बना दे।

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