गर्भ योगेश्वर गुरु बिना , लागा हर का सेव। कहे कबीर बैकुण्ठ से , फेर दिया शुक्देव॥ 129॥
“Without the Guru, the Lord of the womb, everyone serves. Kabir says, He has turned the abode of Vaikuntha into Shukdev's dwelling.”
— कबीर
अर्थ
गर्भ में स्थित योगेश्वर गुरु के बिना, हर कोई सेवा में लग गया। कबीर कहते हैं कि उन्होंने वैकुण्ठ को शुक्देव का निवास बना दिया।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में गुरु के बिना अधूरी साधना की बात करते हैं। वे कहते हैं कि सच्चे गुरु के मार्गदर्शन के बिना, हम सिर्फ ऊपरी तौर पर ईश्वर की सेवा करते रहते हैं। बैकुण्ठ जैसी पवित्र धाम का 'शुक्देव का निवास' बन जाना ये दर्शाता है कि गुरु के बिना, आध्यात्मिक अनुभव भी बस एक व्यक्तिगत या साधारण चीज़ बनकर रह जाता है, उसकी दिव्यता कम हो जाती है। यानी, असली ज्ञान और मोक्ष की राह गुरु ही दिखाते हैं।
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