Sukhan AI
साहिब तेरी साहिबी , सब घट रही समाय। ज्यों मेहँदी के पात में , लाली रखी न जाय॥ 233॥

Your companionship, O beloved, is spread through every heart. Just as the crimson dye cannot be contained within the henna leaf.

कबीर
अर्थ

हे साहिब, आपकी साख (साथ) हर हृदय में फैल रही है। जैसे मेहंदी के पत्ते में लाल रंग को सीमित नहीं किया जा सकता।

विस्तार

यह दोहा बताता है कि ईश्वर की सत्ता और उनका प्रेम हर कण, हर हृदय में बसा हुआ है। जैसे मेहंदी के पत्ते में लाली छिपी होती है, जिसे अलग से रखा नहीं जाता बल्कि वह उसका प्राकृतिक गुण है, वैसे ही साहिब की उपस्थिति भी हमारे भीतर सहज रूप से मौजूद है। यह प्रेम इतना गहरा और स्वाभाविक है कि इसे कहीं बाँधा या छुपाया नहीं जा सकता; यह तो बस स्वयं प्रकट होता है।

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पाठ
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