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कबीर चेरा संत का , दासनि का परदास। कबीर ऐसैं होइ रक्षा , ज्यूँ पाऊँ तलि घास॥ 410॥

Kabir, the devotee of saints, the servant of Paradise. Kabir, thus is the protection, like finding grass at the feet.

कबीर
अर्थ

कबीर कहते हैं कि संत का चेरा और परदेश का दास (सेवक) होना। वे कहते हैं कि रक्षा भी वैसी ही होती है, जैसे पैरों के पास घास मिल जाती है।

विस्तार

कबीर जब कहते हैं कि रक्षा ऐसे होती है जैसे पैरों के नीचे घास, तो वो एक गहरी विनम्रता की बात कर रहे होते हैं। यह कोई भव्य या दिखाई देने वाली ढाल नहीं है, बल्कि एक सूक्ष्म कृपा है जो जीवन के सबसे साधारण पलों में भी मौजूद होती है। यह हमें सिखाता है कि संतों और ईश्वर का आश्रय हमेशा हमारे पास, हमारे कदमों तले, सबसे सहज रूप में उपस्थित है। यह खूबसूरत याद दिलाता है कि जीवन को सहजता और गहरे भरोसे के साथ स्वीकार करें।

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