सतगुरु सम कोई नहीं सात दीप नौ खण्ड। तीन लोक न पाइये , अरु इक्कीस ब्रह्म्ण्ड॥ 468॥
“There is none like the true Guru, in the seven lamps and nine parts. Neither in the three worlds nor in twenty-one universes.”
— कबीर
अर्थ
सतगुरु के समान कोई नहीं, चाहे वह सात दीपों और नौ खंडों में हो, या तीन लोकों और इक्कीस ब्रह्माण्डों में।
विस्तार
कबीरदास जी इस दोहे में बताते हैं कि एक सच्चे गुरु की बराबरी करने वाला इस पूरे ब्रह्मांड में कोई नहीं है। वे कहते हैं कि चाहे सात द्वीप, नौ खंड हों, या तीनों लोक और इक्कीस ब्रह्मांड, कहीं भी गुरु जैसा कोई और नहीं मिल सकता। यह एक सुंदर रूपक है जो गुरु के महत्व को दर्शाता है, कि उनका ज्ञान और मार्गदर्शन इतना अनमोल है कि उसकी तुलना किसी भी सांसारिक या ब्रह्मांडीय चीज़ से नहीं की जा सकती। असल में, गुरु ही सही राह दिखाते हैं और अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान का प्रकाश देते हैं।
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