सतगुरु मिला जु जानिये , ज्ञान उजाला होय। भ्रम का भांड तोड़ि करि , रहै निराला होय॥ 469॥
“When the true Guru is found, the self is understood, / Knowledge shines brightly, dispelling all illusion's shroud. / Breaking the pot of delusion, one remains uniquely free.”
— कबीर
अर्थ
जब सच्चे गुरु का मिलन होता है, तो स्वयं का ज्ञान हो जाता है। ज्ञान के उजाले से भ्रम का घड़ा टूट जाता है, और व्यक्ति अद्वितीय रूप से मुक्त हो जाता है।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में समझाते हैं कि जब हमें सच्चा गुरु मिलता है, तो भीतर ज्ञान का प्रकाश फैल जाता है, जो हमें अपनी सच्ची पहचान कराता है। यह ज्ञान मन के सारे भ्रम और भ्रामक विचारों को एक पल में तोड़ देता है, ठीक वैसे ही जैसे भ्रम का घड़ा फूट जाए। जब हम इन झूठी मान्यताओं और बंधनों को तोड़ देते हैं, तो हम एक अनोखी, शुद्ध और पूर्णतः मुक्त अवस्था में पहुँच जाते हैं।
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