“Like the beloved flowing water, or the dear price of gold; like the beloved mother's lap, or the dear name of devotion.”
जल की तरह प्यारा माथे (या रूप), और लोभ से भरा प्यारा दाम (या धन); माता की गोद जैसा प्यारा स्थान, और भक्ति का प्यारा नाम।
कबीर दास जी इस दोहे में हमें जीवन की कुछ सबसे प्यारी चीज़ों से परिचित करा रहे हैं। वह बताते हैं कि जैसे सबको बहता पानी प्रिय होता है, लालची व्यक्ति को धन प्रिय होता है और हर बच्चे को अपनी माँ की गोद सबसे प्यारी लगती है, ठीक वैसे ही एक सच्चे भक्त को ईश्वर का नाम और भक्ति सबसे अधिक प्रिय होती है। यहां कबीर हमें सिखाते हैं कि संसार के भौतिक सुखों और मोह से कहीं बढ़कर, ईश्वर के नाम में और सच्ची भक्ति में ही असली सुकून और प्रेम छिपा है। यह दोहा हमें भक्ति के सच्चे और अनमोल रिश्ते का महत्व समझाता है।
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