“He who became a devotee of divine love, is himself a God of divinity; Oh! What is God? What are people? What can anyone do to him?”
जो व्यक्ति ईश्वरीय प्रेम का भक्त बन जाता है, वह स्वयं दिव्यता का ईश्वर बन जाता है। ऐसे में, ईश्वर क्या, लोग क्या, कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
यह ख़ूबसूरत शेर हमें सिखाता है कि जो इंसान पूरी तरह से इश्क़ यानी ईश्वरीय प्रेम में डूब जाता है, वह किसी भी सांसारिक शक्ति से कहीं ज़्यादा बड़ा हो जाता है। वह मानो 'खुदाई का खुदा' बन जाता है। शेर पूछता है, 'खुदा क्या? लोग क्या? कोई भी उसका क्या बिगाड़ सकता है?' इसका मतलब है कि जब आप सच्चे आध्यात्मिक प्रेम में लीन हो जाते हैं, तो आप सभी डर और सीमाओं से ऊपर उठ जाते हैं। आप इतने शक्तिशाली और अडिग हो जाते हैं कि कोई भी, यहाँ तक कि सबसे बड़ी शक्तियाँ भी, आपको नकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं कर सकतीं। यह निस्वार्थ, दिव्य भक्ति के माध्यम से परम स्वतंत्रता और शक्ति खोजने के बारे में है।
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