Sukhan AI
કદી લાલી જશે ચાલી, કદી ફૂટી જશે પ્યાલી,
ભલે કો તે ભરી દેને, મને ફરિયાદ શાની છે?

Sometimes the blush will fade, sometimes the cup will break,Let someone else refill it, what complaint can I make?

कलाપી
अर्थ

कभी जीवन की रौनक चली जाएगी, कभी सुख का पात्र टूट जाएगा। कोई और उसे भर दे, मुझे इसकी क्या शिकायत है?

विस्तार

यह दोहा जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति को खूबसूरती से दर्शाता है। यह हमें बताता है कि सुंदरता और यौवन, जिसे 'लाली' या चमक से दर्शाया गया है, आखिरकार फीकी पड़ जाएगी। इसी तरह, आनंद और सुख का 'प्याला' या पात्र, एक दिन टूट जाएगा। ये पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता; सब कुछ अस्थायी है। इस अटल सत्य के बावजूद, कवि पूछते हैं, 'मुझे शिकायत क्यों करनी चाहिए?' वे गहरी स्वीकृति का भाव व्यक्त करते हैं, यह सुझाव देते हुए कि यदि कोई और उस जीवन के प्याले का आनंद लेता है या उसे भरता है, तो भी शिकायत का कोई कारण नहीं है। यह मोह छोड़ने, अनित्यता में शांति खोजने और यह समझने का एक शक्तिशाली संदेश है कि सच्ची संतुष्टि भीतर से आती है, बाहरी सुखों से चिपके रहने से नहीं।

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