Sukhan AI
આ પહોર ચાર જ રાતના, કંઈ વાયદા વીત્યે મળ્યા;
કંઈ હોંશથી જિગરે જડ્યા, તેની કદર તુંને નહીં.

These mere four watches of the night, met after promises untold;With what great zeal enshrined in heart, their worth you can't behold.

कलाપી
अर्थ

रात के ये केवल चार पहर, कुछ वादे बीत जाने के बाद मिले। बड़े उत्साह से दिल में संजोए गए, पर तुम्हें उनकी कद्र नहीं।

विस्तार

यह दोहा अप्रशंसित प्रयास और प्रेम के दर्द को बयां करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे लंबे इंतज़ार और कई वादों के बाद, दो लोग अंततः मिले, शायद रात के चार पहरों की आड़ में। वक्ता इस बात पर ज़ोर देता है कि कैसे ये पल उनके दिल में गहरे और उत्सुकता से अंकित हो गए थे, जो अपार खुशी और लगाव को दर्शाते हैं। हालाँकि, अंत में दुखद सच्चाई सामने आती है: दूसरा व्यक्ति इन अनमोल यादों और प्रयासों की सराहना या कद्र नहीं करता। यह एकतरफा स्नेह और उस प्रेम के दुख के बारे में एक हार्दिक विलाप है जिसकी भावना उसी गहराई के साथ प्रतिदान नहीं की जाती।

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