“Before me stands a maiden fair, a pot upon her head,Her small hand raised, a bead of sweat from her brow to shed.”
मेरे सामने एक नवयुवती खड़ी है जिसके सिर पर घड़ा है। वह पसीना पोंछने के लिए अपना छोटा हाथ अपने चेहरे पर उठाती है।
यह दोहा एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है। कल्पना कीजिए एक युवा, नई-नवेली युवती आपके सामने खड़ी है, अपने सिर पर पानी का घड़ा संतुलित किए हुए। धूप की तपिश से उसके माथे पर पसीने की कुछ बूंदें उभर आई हैं। बड़े ही सहजता और कोमलता से, वह अपना छोटा-सा हाथ उठाकर अपने चेहरे से पसीने की उन नन्हीं बूंदों को पोंछ रही है। यह दृश्य उसकी मेहनत, सहज सुंदरता और रोज़मर्रा के कार्यों में भी छिपी नज़ाकत को दर्शाता है। यह एक साधारण पल को भी कितनी खूबी से चित्रित करता है, जहाँ परिश्रम में भी एक अनोखी शोभा है।
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