હો ગુર્જરીની ઓથ કે ઉર્દૂની ઓ ‘મરીઝ',
ગઝલો ફક્ત લખાય છે દિલની ઝબાનમાં.
“Whether under Gujarati's wing or Urdu's, O Mareez,Ghazals are penned solely in the heart's own tongue.”
— मरीज़
अर्थ
हे मरीज़, चाहे गुजराती की छाया में हो या उर्दू की, ग़ज़लें केवल दिल की ज़बान में ही लिखी जाती हैं।
विस्तार
यह खूबसूरत शेर 'मरीज़' हमें सिखाता है कि किसी ग़ज़ल की सच्ची आत्मा किसी खास भाषा तक सीमित नहीं होती, चाहे वो गुजराती हो या उर्दू। मरीज़ कहते हैं कि ग़ज़लें केवल दिल की ज़बान में लिखी जाती हैं। इसका मतलब है कि आप किसी भी भाषा में लिखें, ग़ज़ल का असली सार, उसकी गहरी भावनाएँ और सच्ची अनुभूतियाँ ही उसे खास बनाती हैं। सबसे ज़्यादा ज़रूरी दिल से निकली हुई अभिव्यक्ति है, केवल शब्द नहीं। यह भावनाओं की सार्वभौमिक भाषा है जो हर किसी से जुड़ती है।
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