माने हों क्यूँ कि गिर्या-ए-ख़ूनीं के इश्क़ में
है रब्त-ए-ख़ास चश्म को इफ़शा-ए-राज़ से
“Why should they assume that in the love of the blood-soaked mountain, there is a special bond from the eye's revelation of secrets?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
माना क्यों कि खून से सनी हुई पहाड़ी के इश्क़ में, आँख की रहस्योद्घाटन से कोई खास रिश्ता है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के आँसुओं की गहराई और रहस्य को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर पूछते हैं कि लोग यह मान क्यों लेते हैं कि ख़ूनी आँसुओं में कोई खास रिश्ता होता है, जो आँखों से राज़ खोल दे। वह कहते हैं कि रोना, भले ही किसी बात का पता दे, लेकिन यह वह विशेष अर्थ नहीं है जो लोग उसे मान देते हैं। यह आँखों की अनकही भाषा और दिल टूटने के रहस्य पर एक चिंतन है।
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