शायद कबाब कर कर खाया कबूतर उन ने
नामा उड़ा फिरे है उस की गली में पर सा
“Perhaps the pigeons ate the kababs, they spread the name In that alleyway of his, but it's nothing, my dear.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायद कबूतरों ने कबाब खाए, और उस गली में उनका नाम फैला दिया, पर कोई बात नहीं, मेरे प्यारे।
विस्तार
यह शेर बताता है कि दुनिया में क्या चीज़ ज़्यादा मायने रखती है। शायर कहते हैं कि भले ही कोई छोटी सी घटना हो, जैसे कबूतरों का कबाब खा जाना, यह बात तो बस है। लेकिन असली चोट, असली नुकसान तो 'नामा' से होता है—यानी मान-सम्मान की बदनामी। यह शे'र हमें सिखाता है कि हमारी प्रतिष्ठा और हमारी छवि, किसी भी भौतिक घटना से कहीं ज़्यादा नाज़ुक और ज़्यादा क़ीमती होती है।
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