गोर किस दिलजले की है ये फ़लक
शोला इक सुब्ह याँ से उठता है
“Whose heart's sorrow is this sky, A flame rises from this morning.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
गोर किस दिलजले की है ये फ़लक, शोला इक सुब्ह याँ से उठता है। इसका शाब्दिक अर्थ है कि यह आकाश किस हृदय के दुःख का है, और एक सुबह से ज्वाला उठती है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस गहराई को बयां करता है, जो किसी सीमा में बंध नहीं है। शायर कहते हैं कि यह जो दिलजलन है, यह फ़लक (आसमान) में भी दिखाई देती है। यह कोई अचानक हुआ शोला नहीं है, बल्कि यह तो सुबह के उजाले की तरह धीरे-धीरे, मगर पक्का उठता है। मतलब है कि कुछ एहसास इतने सच्चे होते हैं कि वे प्रकृति का हिस्सा बन जाते हैं।
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