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ख़ाना-ए-दिल से ज़ीनहार न जा
कोई ऐसे मकाँ से उठता है

Do not leave the house of the heart, O embellisher (of life); Someone rises from such a place.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

दिल के घर से गहना न जा, कोई ऐसे ठिकाने से उठता है।

विस्तार

यह शेर दिल की नज़ाकत और उसके टूटने के डर को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि अपने दिल की सुंदरता या रौनक किसी को मत देना, क्योंकि दिल इतना नाज़ुक होता है कि कहीं कोई और आकर उसकी सारी चमक छीन न ले। यह इश्क़ के गहरे घावों और भावनात्मक असुरक्षा की कहानी है।

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