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ये ज़ुल्म-ए-बे-निहायत दुश्वार-तर कि ख़ूबाँ
बद-वज़इयों को अपनी महमूद जानते हैं

These hardships are so difficult that even the beloved knows them as easy.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ये ज़ुल्म इतने कठिन हैं कि ख़ूबसूरत (या प्रिय) भी इन्हें आसान मानते हैं।

विस्तार

यह शेर उस दर्द की गहराई को बयां करता है जो किसी सामान्य ज़ुल्म से कहीं ज़्यादा है। शायर कहते हैं कि जो तकलीफें झेलनी पड़ रही हैं, वो इतनी मुश्किल हैं कि वो बुरी आदतों की मुश्किलों से भी ज़्यादा हैं। यह तुलना हमें बताती है कि उनका दर्द इतना गहरा है कि उसे किसी साधारण चीज़ से मापा नहीं जा सकता। यह एक दिल की बहुत बड़ी, गहरी शिकायत है।

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