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चश्म-ए-नमनाक ओ दिल-ए-पुर जिगर-ए-सद-पारा
दौलत-ए-इश्क़ से हम पास भी था क्या क्या कुछ

Oh, captivating eyes, and heart filled with immense passion, From the wealth of love, what wonders did we once possess.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

चश्म-ए-नमनाक और दिल-ए-पुर-जिगर-ए-सद-पारा, इश्क़ की दौलत से हम क्या-क्या कुछ पास थे।

विस्तार

ये शेर एक गहरे दर्द, एक बड़े खालीपन को बयां करता है। शायर अपने महबूब की नज़रों और दिल को संबोधित करते हैं और पूछते हैं कि इश्क़ की दौलत में भी हम क्या-क्या खो बैठे? यह सिर्फ प्यार की बात नहीं है.... यह उस एहसास की बात है, जब इंसान को लगता है कि जीवन का कोई भी खजाना, कोई भी रिश्ता, उसे इस दर्द से नहीं बचा सकता।

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