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दर्द-ए-दिल ज़ख़्म-ए-जिगर कुल्फ़त-ए-ग़म दाग़-ए-फ़िराक़
आह 'आलम से मिरे साथ चला क्या क्या कुछ

The pain of the heart, the wound of the liver, the sorrow of the rose, the stain of separation; alas, what all has accompanied me in this world?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

दिल का दर्द, जिगर का ज़ख्म, ग़म की कुल्फ़त और फ़िराक़ का दाग़; आह 'आलम से मेरे साथ क्या-क्या कुछ चला।

विस्तार

यह शेर एक गहरे दर्द और तन्हाई का एहसास कराता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर यहाँ अपने सारे ज़ख्मों का हिसाब दे रहे हैं—दिल का दर्द, जिगर की चोट, गम की उदासी, और बिछड़ने का दाग। और फिर वह पूरे आलम से पूछते हैं, 'ऐ दुनिया, मेरे साथ क्या-क्या गुज़रा?' यह सवाल सिर्फ़ पूछना नहीं है, बल्कि अपने अकेलेपन और दर्द के बोझ को दुनिया के सामने खोल देना है।

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