नाला-ए-मीर सवाद में हम तक दोशीं शब से नहीं आया
शायद शहर से उस ज़ालिम के आशिक़ वो बदनाम गया
“From the stream of Mir, we have not been guilty of such a deed for many nights; perhaps, the lover of that cruel person went infamous from the city.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मीरे नाले में इस तरह का गुनाह हमने कई रातों से नहीं किया होगा; शायद उस ज़ालिम के आशिक़ को शहर से बदनाम होना पड़ गया।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने इंसान के इज़्ज़त और बदनाम होने के दर्द को बयां किया है। शायर कह रहे हैं कि मेरे ऊपर जो कल रात का कोई छोटा-मोटा दाग़ है, वो तो बात नहीं है। असली बात ये है कि मेरी पहचान ही... इस शहर ने, उस ज़ालिम ने, बदनाम कर दी है। यह महज़ एक शिकायत नहीं है, बल्कि उस टूटी हुई इज़्ज़त का दर्द है जो किसी की मर्ज़ी से भी मिटाई जा सकती है।
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