मय-ख़ाना वो मंज़र है कि हर सुब्ह जहाँ शैख़
दीवार पे ख़ुर्शीद का मस्ती से सर आवे
“That tavern is a scene where every morning, Sheikh Sees the sun's joyful head appear upon the wall.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
वह मयखाना ऐसा नज़ारा है कि हर सुबह जहाँ शैख़ दीवार पर ख़ुर्शीद का मस्ती से सिर आते हैं।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही नशीला और गहरा मंज़र पेश करता है। शायर कहते हैं कि मय-ख़ाना (शराबखाना) कोई साधारण जगह नहीं है, बल्कि एक ऐसा नज़ारा है... जहाँ हर सुबह सूरज भी मस्ती में आता है। यह नज़ारा बताता है कि महफ़िल का ये जोश, ये जश्न, ये मस्ती कभी ख़त्म नहीं होती। यह एक ऐसे जीवन की बात है जो हमेशा जश्न में डूबा रहे।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
