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गया नज़र से जो वो गर्म तिफ़्ल-ए-आतिश-बाज़
हम अपने चेहरे पे उड़ती हवाइयाँ देखीं

The one who is a fiery bird, whose gaze is a scorching ash, We saw mere winds blowing upon our faces.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

गया नज़र से जो वो गर्म तिफ़्ल-ए-आतिश-बाज़, हमने तो बस अपने चेहरे पर उड़ती हवाइयाँ देखीं।

विस्तार

यह शेर दर्द और आत्म-जागरूकता के बीच का अंतर समझाता है। 'गर्म तिफ़्ल' महबूब के बिछड़ने का तीखा, जलता दर्द है। लेकिन शायर कहते हैं कि असली तकलीफ उस बाहरी दर्द में नहीं थी, बल्कि उस हवा में थी जो हमारे अपने चेहरे पर चल रही थी। यह बताता है कि कई बार, हम अपनी अंदरूनी उलझनों को बाहरी नुकसान से कहीं ज़्यादा महसूस करते हैं।

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