किन ने सुन शेर-ए-'मीर' ये न कहा
कहियो फिर हाए क्या कहा साहब
“Who told the Lion-like poet 'Mir' that he had not said it? Oh, what did you say, sir, what did you say?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
किसने शायर मीर से कहा कि आपने यह नहीं कहा। अरे, आपने क्या कहा, साहब, क्या कहा।
विस्तार
यह शेर एक मज़ाकिया, लेकिन बहुत गहरा संवाद है। शायर यहाँ अपनी ही शायरी पर बात कर रहे हैं। वे श्रोता से पूछ रहे हैं कि क्या किसी ने मीर के शेर नहीं सुने? यह पूछना नहीं है, बल्कि यह कहना है कि मीर की शायरी इतनी कमाल की है कि इसे बार-बार सुना जाना चाहिए। यह एक तरह का poetic ego है, लेकिन बहुत नजाकत से भरा है। यह साबित करता है कि शायरी का असर कितना गहरा होता है।
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