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नाचार हो रुख़्सत जो मँगा भेजी तो बोला
मैं क्या करूँ जो 'मीर'-जी जाते हैं सुधारें

If I ask for your departure, you said, 'What can I do, 'Mir'-ji, I must correct/reform.'

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अगर मैं तुम्हारा विरह (जुदाई) माँगू, तो तुमने कहा, 'मैं क्या करूँ, मीर जी, मुझे सुधारना है।'

विस्तार

यह शेर एक शायर का अद्भुत नज़रिया दिखाता है। जब महबूब रुख़्सत माँगता है या कोई संदेश भेजता है, तो शायर अपनी विदाई पर दुखी नहीं होता। वह ध्यान को अपनी ओर खींच लेता है। वह कह रहा है कि मेरे जाने या दूर होने से ज़्यादा मायने मेरे प्रभाव से रखता है। यह शायर का एक बहुत बड़ा, आत्मविश्वासी दावा है कि उसकी मौजूदगी ही सब कुछ है!

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