बहस है नाक़िसों से काश फ़लक
मुझ को इस ज़ुमरे से निकाल रखे
“Oh, I wish the sky would remove me from this group of imperfect souls.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कहता है कि वह नासमझ लोगों से बहस करना बंद करना चाहता है और चाहता है कि यह दुनिया उसे इस समूह से हटा दे।
विस्तार
यह शेर दिल की उस उदासी को बयान करता है, जब इंसान को लगता है कि वह ऐसे लोगों के बीच फँस गया है जो अपूर्ण हैं। शायर कहते हैं कि नाक़िसों से बहस करना कितना थका देने वाला काम है। उन्हें बस यह दुआ है कि फ़लक (आसमान) आकर उन्हें इस भीड़ या ज़ुमरे से निकाल दे। यह केवल एक शिकायत नहीं है, बल्कि एक गहरे अकेलेपन और निराशा का एहसास है।
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