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बाग़-ओ-बहार है वो मैं किश्त-ए-ज़ाफ़राँ हूँ
जो लुत्फ़ इक इधर है तो याँ भी इक समाँ है

I am the garden of bloom and joy, I am the stream of saffron hue, If pleasure resides in one place, then in this place, a similar scene is due.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं बहारों और खुशियों का बाग़ हूँ, मैं केसरिया रंग की धारा हूँ; जहाँ एक जगह आनंद है, वहाँ भी एक जैसा माहौल है।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ तारीफ नहीं है, बल्कि एक पूरी पहचान है! शायर कहते हैं कि मैं तो ख़ुद एक बाग़-ओ-बहार हूँ.... और मेरा वजूद, ज़ाफ़राँ के रंग जैसा अनमोल है। मतलब ये कि, जहाँ भी मेरी मौजूदगी का अहसास हो.... वहाँ एक अलग ही समाँ, एक अलग ही रौनक होती है! यह अपने रंग और अपनी ख़ुशबू का इक़रार है!

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