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रात हैरान हूँ कुछ चुप ही मुझे लग गई 'मीर'
दर्द पिन्हाँ थे बहुत पर लब-ए-इज़हार न था

Tonight, I am bewildered, remaining silent, 'Meer', Though there were many pains, my lips were not ready to speak.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

रात को मैं कुछ हैरान और चुप महसूस कर रहा हूँ, 'मीर'। बहुत दर्द मेरे अंदर थे, पर मेरे होंठ इज़हार करने के लिए तैयार नहीं थे।

विस्तार

यह शेर अंदर दबी भावनाओं का वर्णन करता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि रात का सन्नाटा उन्हें हैरान कर गया... कि उन्हें चुपचाप रहना पड़ रहा है। असली दर्द तो दिल में बहुत था, पर होंठों पर उसे बयां करने की ज़बरदस्ती नहीं थी। यह उस गहरे अकेलेपन को दिखाता है, जब दर्द इतना गहरा हो कि ज़ुबान पर आ ही नहीं सकता।

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