नर्म-तर मोम से भी हम को कोई देती क़ज़ा
संग छाती का तो ये दिल हमें दरकार न था
“From the softest wax, no one gives us fate, The breast's company, this heart did not require.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
नर्म-तर मोम से भी हमें कोई क़ज़ा नहीं देती, साथ छाती का तो ये दिल हमें दरकार नहीं था।
विस्तार
यह शेर भावनात्मक दर्द और लगाव की नाज़ुक हकीकत को बयान करता है। शायर, मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि नर्म-तर मोम से भी हमें कोई क़ज़ा दे.... लेकिन जब छाती में एक दिल बस महज़ दरकार नहीं होता। इसका मतलब है कि कभी-कभी जो चीज़ें हमारे पास होती हैं, लेकिन जिन्हें हम महसूस नहीं करते, वो बोझ बन जाती हैं। यह वियोग और तसल्ली का बहुत गहरा एहसास है।
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