“Some eat, some fight, some in play engage, Some sleep, some walk, varied tasks upon life's stage. As the train with a 'chee-ee' sound, enters the tunnel's dark domain, Then all...”
लोग खाते-पीते, लड़ते-झगड़ते, खेलते, सोते-जागते और चलते हुए नाना प्रकार के काम करते हैं। जब गाड़ी 'ची-ईई' की आवाज़ करते हुए सुरंग में जाती है, तब सब...
यह दोहा लोगों के रोज़मर्रा के जीवन का एक सजीव चित्र प्रस्तुत करता है। कोई खाना खा रहा है, कोई झगड़ रहा है, कोई खेल रहा है, कोई सो रहा है, और कोई बस चल रहा है। हर कोई अपनी अलग-अलग गतिविधियों में व्यस्त है। फिर अचानक, एक ट्रेन 'चिंईई' की आवाज़ करती हुई सुरंग में प्रवेश करती है। यह कविता दर्शाती है कि इन सभी विविध मानवीय गतिविधियों के बीच, ट्रेन के सुरंग में प्रवेश करने का यह क्षण सभी का ध्यान अपनी ओर खींचता है। शायद यह उन्हें रुकने और देखने पर मजबूर करता है, इस एक साझा संवेदी घटना के माध्यम से सभी व्यक्तिगत अनुभवों को जोड़ता है।
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