“O folk, how wondrous it becomes, that very hour,When for a brief moment, in the darkness, one's beloved,Is pressed close to the breast; that bliss is truly heaven's,And then, for someone, the train.”
हे लोगो, वह पल कितना अद्भुत हो जाता है, जब थोड़ी देर के अंधेरे में कोई अपने प्रियजन को सीने से लगाता है; वह आनंद वास्तव में स्वर्ग जैसा होता है, और फिर, किसी के लिए, ट्रेन होती है।
जरा सोचिए, अचानक अँधेरा छा जाए, जैसे बत्ती गुल हो जाए या ट्रेन किसी सुरंग से गुज़रे। ऐसे छोटे से, अचंभित करने वाले अँधेरे पल में, अगर आपका कोई प्रियजन आपके साथ हो और आप उसे अपने सीने से लगा लें, तो वह एहसास कितना खास होता है! यह एक ऐसी गहरी और शुद्ध खुशी है, जो किसी स्वर्ग के अनुभव से कम नहीं। यह दोहा उस अनोखे, अंतरंग पल को बख़ूबी दर्शाता है, जब अचानक आई क्षणिक शून्यता के बीच आपको अपने प्रिय के साथ अद्भुत सुकून और गहरा जुड़ाव महसूस होता है।
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