પરવતની તળેટી તેથી થોડેક દૂરે,
સુણું અટકતી ગાતી કુંજ ધીમે જ સૂરે;
“From the mountain's base, a little distance away, I hear the grove singing, haltingly, in a soft, slow lay.”
— नर्मद
अर्थ
पर्वत की तलहटी से थोड़ी दूर, मैं कुंज को रुक-रुक कर धीरे ही स्वर में गाते हुए सुनता हूँ।
विस्तार
कल्पना कीजिए कि आप एक बड़े पहाड़ के पास, उसकी तलहटी में खड़े हैं। वहां से थोड़ी ही दूरी पर, आपको एक प्यारी आवाज़ सुनाई देती है। यह किसी पक्षी की मधुर गीत की तरह है, शायद कोई कोयल रुक-रुक कर गा रही है। उसकी आवाज़ तेज़ नहीं, बल्कि धीमी और कोमल है, जैसे कोई धीरे-धीरे गुनगुना रहा हो। यह दृश्य पहाड़ की शांत तलहटी में प्रकृति के संगीत को धीरे से गूंजते हुए दिखाता है। यह शांति और प्राकृतिक सुंदरता का एक क्षण है, जो ध्वनि के माध्यम से अनुभव किया जा रहा है।
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