પાણી પાણી સકળ વનની કુંજમાંહે મચે ને,
પહાડી ભૂમિ ચકચક બને સાફ ધોવાઇને રે;
“Water, water, fills all the forest's leafy bowers, The hilly land now sparkles, washed clean by the showers.”
— नर्मद
अर्थ
समस्त वन की कुंजों में पानी भर जाता है, और पहाड़ी भूमि धुलकर स्वच्छ चमकने लगती है।
विस्तार
यह दोहा बारिश के बाद प्रकृति में होने वाले बदलाव को खूबसूरती से दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि जंगल के हर कोने, हर कुंज में पानी भर जाता है, जिससे वहाँ एक जीवंत और चंचल माहौल बन जाता है। फिर, यह बताता है कि बारिश से पहाड़ी ज़मीन पूरी तरह से धुल जाती है, और एकदम साफ व चमकदार हो जाती है। यह ऐसा है मानो प्रकृति ने एक नई और ताज़गी भरी स्नान की हो, जिससे सब कुछ जीवंत और नया दिखने लगता है और चमकने के लिए तैयार हो जाता है।
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